وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ ءَامِنُواْ كَمَآ ءَامَنَ ٱلنَّاسُ قَالُوٓاْ أَنُؤۡمِنُ كَمَآ ءَامَنَ ٱلسُّفَهَآءُۗ أَلَآ إِنَّهُمۡ هُمُ ٱلسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعۡلَمُونَ ١٣
तथा6 जब उनसे कहा जाता है : ईमान लाओ जिस तरह लोग ईमान लाए हैं, तो कहते हैं : क्या हम ईमान लाएँ, जैसे मूर्ख ईमान लाए हैं? सुन लो! निःसंदेह वे स्वयं ही मूर्ख हैं, परंतु वे नहीं जानते।
फ़ुटनोट
6 यह दशा उन मुनाफ़िक़ों की है, जो अपने स्वार्थ के लिए मुसलमान हो गए, परंतु दिल से इनकार करते रहे।
तफ़सीर
जब उन्हें मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों के ईमान लाने की तरह ईमान लाने का आदेश दिया जाता है, तो वे अस्वीकृति और उपहास के रूप में उसका उत्तर देते हुए कहते हैं : क्या हम अल्पबुद्धि वालों के ईमान लाने की तरह ईमान ले आएँ?! सच तो यह है कि वे स्वयं मूर्ख हैं, लेकिन वे इससे अनजान हैं।