सूरह Al-Baqarah, आयत 118

2:118

وَقَالَ ٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ لَوۡلَا يُكَلِّمُنَا ٱللَّهُ أَوۡ تَأۡتِينَآ ءَايَةٞۗ كَذَٰلِكَ قَالَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِم مِّثۡلَ قَوۡلِهِمۡۘ تَشَٰبَهَتۡ قُلُوبُهُمۡۗ قَدۡ بَيَّنَّا ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يُوقِنُونَ ١١٨

तथा उन लोगों ने कहा जो ज्ञान60 नहीं रखते : अल्लाह हमसे बात क्यों नहीं करता? या हमारे पास कोई निशानी क्यों नहीं आती? इसी प्रकार उन लोगों ने जो इनसे पूर्व थे, इनकी बात जैसी बात कही। इनके दिल एक-दूसरे जैसे हो गए हैं। निःसंदेह हमने उन लोगों के लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, जो विश्वास करते हैं।

फ़ुटनोट

60 अर्थात अरब के मिश्रणवादियों ने।

तफ़सीर

अह्ले किताब और बहुदेववादियों में से जो नहीं जानते, उन्होंने सत्य के प्रति हठ के कारण कहा : अल्लाह हमसे बिना किसी मध्यस्थ के बात क्यों नहीं करता, या हमारे पास हमारे ही लिए विशिष्ट कोई भौतिक निशानी क्यों नहीं आती? इन लोगों की इसी बात की तरह, इससे पहले झुठलाने वाले समुदायों ने भी अपने रसूलों से कही थी, भले ही उनके समय और स्थान अलग-अलग हों। इन लोगों के दिल कुफ़्र, हठ और अहंकार में उन लोगों के दिलों के समान हैं जो इनसे पहले थे। हमने उन लोगों के लिए आयतें स्पष्ट कर दी हैं, जो सत्य पर विश्वास करते हैं, जब वह उनके सामने प्रकट होता है, न तो उन्हें कोई संदेह घेरता है और न ही हठ उन्हें रोकता है।