وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ ٨٤
और हमने उनपर (पत्थरों की) भारी बारिश बरसाई। तो देखो अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ?
तफ़सीर
और हमने उनपर एक भीषण बारिश बरसाई। हमने उन पर मिट्टी के पत्थर (कंकड़) बरसाए और गाँव को उलट दिया। चुनाँचे उसके ऊपरी हिस्से को नीचे कर दिया। अतः (ऐ रसूल!) विचार करें कि लूत की जाति के अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ? निश्चय उनका परिणाम विनाश और अनंत अपमान था।