وَسۡـَٔلۡهُمۡ عَنِ ٱلۡقَرۡيَةِ ٱلَّتِي كَانَتۡ حَاضِرَةَ ٱلۡبَحۡرِ إِذۡ يَعۡدُونَ فِي ٱلسَّبۡتِ إِذۡ تَأۡتِيهِمۡ حِيتَانُهُمۡ يَوۡمَ سَبۡتِهِمۡ شُرَّعٗا وَيَوۡمَ لَا يَسۡبِتُونَ لَا تَأۡتِيهِمۡۚ كَذَٰلِكَ نَبۡلُوهُم بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ ١٦٣
तथा (ऐ नबी!) उनसे उस बस्ती के संबंध में पूछें, जो समुद्र (लाल सागर) के किनारे पर थी, जब वे शनिवार के दिन के विषय में सीमा का उल्लंघन60 करते थे, जब उनके पास उनकी मछलियाँ उनके शनिवार के दिन पानी की सतह पर प्रत्यक्ष होकर आती थीं और जिस दिन उनका शनिवार न होता, वे उनके पास नहीं आती थीं। इस प्रकार हम उनका परीक्षण करते थे, इस कारण कि वे अवज्ञा करते थे।
फ़ुटनोट
60 क्योंकि उनके लिए यह आदेश था कि शनिवार को मछलियों का शिकार नहीं करेंगे। अधिकांश भाष्यकारों ने उस नगरी का नाम ईला (ईलात) बताया है, जो क़ुल्ज़ुम सागर के किनारे पर आबाद थी।
तफ़सीर
तथा (ऐ रसूल!) इन यहूदियों को वह सज़ा याद दिलाने के लिए, जिसके साथ अल्लाह ने उनके पूर्वजों को दंडित किया था, उनसे उस बस्ती की कहानी पूछिए, जो समुद्र के निकट थी, जब उसके निवासी मनाही के बावजूद शनिवार के दिन शिकार करके अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन कर रहे थे। जब अल्लाह ने उनका इस तरह परीक्षण किया कि शनिवार के दिन मछलियाँ समुद्र की सतह पर प्रत्यक्ष होकर उनके पास आने लगीं, जबकि अन्य दिनों में वे उनके पास नहीं आती थीं। अल्लाह ने उन्हें इस प्रकार की परीक्षा में इसलिए डाला कि वे अल्लाह के आज्ञापालन के दायरे से निकल गए थे और गुनाह करने लगे थे। चुनाँचे उन्होंने मछलियों का शिकार करने के लिए यह चाल चली कि उन्होंने जाल लगा दिए और गड्ढे खोद लिए। इस तरह शनिवार के दिन मछलियाँ उन जालों फँस जाती थीं और गड्ढों में गिर जाती थीं। फिर वे रविवार के दिन उन्हें पकड़कर खा जाते थे।