وَجَٰوَزۡنَا بِبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱلۡبَحۡرَ فَأَتَوۡاْ عَلَىٰ قَوۡمٖ يَعۡكُفُونَ عَلَىٰٓ أَصۡنَامٖ لَّهُمۡۚ قَالُواْ يَٰمُوسَى ٱجۡعَل لَّنَآ إِلَٰهٗا كَمَا لَهُمۡ ءَالِهَةٞۚ قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٞ تَجۡهَلُونَ ١٣٨
और हमने बनी इसराईल को सागर के पार उतार दिया। तो वे एक ऐसी जाति पर आए, जो अपनी कुछ मूर्तियों पर जमी बैठी थी। उन्होंने कहा : ऐ मूसा! हमारे लिए कोई पूज्य बना दीजिए, जैसे इनके कुछ पूज्य हैं। (मूसा ने) कहा : निःसंदेह तुम ऐसे लोग हो जो नादानी करते हो।
तफ़सीर
और हमने बनी इसराईल को समुद्र पार करा दिया, जब मूसा ने उसमें अपनी लाठी मारी और वह फट गया। चुनाँचे उसे पार करने के बाद वे ऐसी जाति के पास से गुज़रे, जो अपनी कुछ मूर्तियों की पूजा में लगी हुई थी, जिन्हें वह अल्लाह को छोड़कर पूजती थी। उसे देखकर बनी इसराईल ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ मूसा! हमारे लिए एक ऐसी मूर्ति बना दीजिए जिसकी हम पूज करें, जैसे कि इन लोगों के पास कुछ मूर्तियों हैं, जिनकी वे अल्लाह के सिवा पूजा करते हैं। तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निश्चय तुम ऐसे लोग हो जो इस बात से अनभिज्ञ हो कि अल्लाह के लिए क्या सम्मान और एकेश्वरवाद अनिवार्य है, और उसके लिए क्या चीज़ अशोभनीय है जैसे कि शिर्क और उसके अलावा की पूजा।