सूरह Al-'Ankabut, आयत 64

29:64

وَمَا هَٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَآ إِلَّا لَهۡوٞ وَلَعِبٞۚ وَإِنَّ ٱلدَّارَ ٱلۡأٓخِرَةَ لَهِيَ ٱلۡحَيَوَانُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ ٦٤

और दुनिया का यह जीवन39 केवल मनोरंजन और खेल है। और निःसंदेह आखिरत का घर ही निश्चय वास्तविक जीवन है, यदि वे जानते होते।

फ़ुटनोट

39 अर्थात जिस सांसारिक जीवन का संबंध अल्लाह से न हो, तो उसका सुख सामयिक है। वास्तविक तथा स्थायी जीवन तो परलोक का है। अतः उसके लिए प्रयास करना चाहिए।

तफ़सीर

और यह सांसारिक जीवन (जिसमें उसकी मनपसंद चीज़ें और लाभ के सामान शामिल हैं) उन लोगों के दिलों के लिए, जो इससे चिपके हुए हैं, केवल मनोरंजन और खेल है, जो जल्द ही समाप्त हो जाता है। और निश्चित रूप से आखिरत का घर ही वास्तविक जीवन है, क्योंकि वही बाक़ी रहने वाला है। अगर वे इस तथ्य से अवगत होते, तो नाश होने वाले को बाक़ी रहने वाले पर प्राथमिकता न देते।