सूरह Al-Anfal, आयत 39

8:39

وَقَٰتِلُوهُمۡ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتۡنَةٞ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ كُلُّهُۥ لِلَّهِۚ فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِمَا يَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ ٣٩

तथा उनसे युद्ध करो, यहाँ तक कि कोई फ़ितना18 न रह जाए और धर्म पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए। फिर यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो निःसंदेह अल्लाह जो कुछ वे कर रहे हैं, उसे खूब देखने वाला है।

फ़ुटनोट

18 इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कहा : नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुश्रिकों से उस समय युद्ध कर रहे थे जब मुसलमान कम थे। और उन्हें अपने धर्म के कारण सताया, मारा और बंदी बना लिया जाता था। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4650, 4651)

तफ़सीर

और (ऐ मोमिनो!) अपने काफिर दुश्मनों से युद्ध करो, यहाँ तक कि न शिर्क रहे और न ही मुसलमानों को अल्लाह के धर्म से रोकना, तथा धर्म और आज्ञाकारिता एकमात्र अल्लाह के लिए रह जाए, जिसमें उसका कोई साझी न हो। फिर यदि काफ़िर अपने शिर्क और अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उन्हें छोड़ दो। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है, उससे कोई बात छिपी नहीं है।