وَذَا ٱلنُّونِ إِذ ذَّهَبَ مُغَٰضِبٗا فَظَنَّ أَن لَّن نَّقۡدِرَ عَلَيۡهِ فَنَادَىٰ فِي ٱلظُّلُمَٰتِ أَن لَّآ إِلَٰهَ إِلَّآ أَنتَ سُبۡحَٰنَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ٨٧
तथा मछली वाले34 (की कहानी याद करो), जब वह ग़ुस्से से भरा हुआ चला गया35 और उसने सोचा कि हम उसे तंगी में नहीं डालेंगे। अंततः उसने अंधेरों में पुकारा कि (ऐ अल्लाह!) तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।36
फ़ुटनोट
34 इससे अभिप्रेत यूनुस अलैहिस्सलाम हैं। उनको ''ज़ुन्नून'' और "साह़िबुल ह़ूत" कहा गया है। अर्थात मछली वाला। क्योंकि उनको अल्लाह के आदेश से एक मछली ने निगल लिया था। इसका कुछ वर्णन सूरत यूनुस में आ चुका है। और कुछ सूरतुस-साफ़्फ़ात में आ रहा है।
35 अर्थात अपनी जाति से क्रोधित होकर अल्लाह के अनुमति के बिना अपनी बस्ती से चले गए। इसी पर उन्हें पकड़ लिया गया।
36 सह़ीह़ ह़दीस में आता है कि जो भी मुसलमान इस शब्द के साथ किसी विषय में दुआ करेगा तो अल्लाह उसकी दुआ को स्वीकार करेगा। (तिर्मिज़ी : 3505)
तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) मछली वाले नबी, यूनुस अलैहिस्सलाम की कहानी याद करें, जब वह अपनी जाति के लोगों की लगातार अवज्ञा के कारण उनसे नाराज़ होकर अपने रब की अनुमति के बिना चले गए। उन्होंने समझा कि हम उनके चले जाने की सज़ा के तौर पर उन्हें तंगी में नहीं डालेंगे। लेकिन जब मछली ने उन्हें निगल लिया, तो वह गंभीर तंगी और क़ैद से पीड़ित हुए। तो उन्होंने मछली के पेट, समुद्र और रात के अंधेरे में, अपने पाप को स्वीकार करते हुए, अल्लाह के सामने तौबा करते हुए दुआ की : तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू पाक एवं पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में से हो गया हूँ।