يُسَبِّحُونَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ لَا يَفۡتُرُونَ ٢٠
वे रात-दिन (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते हैं, दम नहीं लेते।
तफ़सीर
वे हमेशा अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं। उससे उकताते नहीं हैं।
يُسَبِّحُونَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ لَا يَفۡتُرُونَ ٢٠
वे रात-दिन (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते हैं, दम नहीं लेते।
वे हमेशा अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं। उससे उकताते नहीं हैं।