لَوۡ أَرَدۡنَآ أَن نَّتَّخِذَ لَهۡوٗا لَّٱتَّخَذۡنَٰهُ مِن لَّدُنَّآ إِن كُنَّا فَٰعِلِينَ ١٧
यदि हम कोई खेल बनाना चाहते, तो निश्चय उसे अपने पास से बना9 लेते। (परंतु) हम ऐसा करने वाले नहीं हैं।
फ़ुटनोट
9 अर्थात इस विशाल संसार को बनाने की आवश्यक्ता न थी। इस आयत में यह बताया जा रहा है कि इस संसार को खेल नहीं बनाया गया है। यहाँ एक साधारण नियम काम कर रहा है। और वह सत्य और असत्य के बीच संघर्ष का नियम है। अर्थात यहाँ जो कुछ होता है वह सत्य की विजय और असत्य की पराजय के लिए होता है। और सत्य के आगे असत्य समाप्त हो कर रह जाता है।
तफ़सीर
यदि हम पत्नी या पुत्र बनाना चाहते, तो निश्चय हम उसे उससे बना लेते जो हमारे पास है। हालाँकि हम ऐसा करने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम इससे पवित्र हैं।