إِنَّ ٱلَّذِينَ فَرَّقُواْ دِينَهُمۡ وَكَانُواْ شِيَعٗا لَّسۡتَ مِنۡهُمۡ فِي شَيۡءٍۚ إِنَّمَآ أَمۡرُهُمۡ إِلَى ٱللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ ١٥٩
जिन लोगों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर लिए और विभिन्न गिरोहों में बट गए, आपका उनसे कोई संबंध नहीं। उनका मामला अल्लाह के हवाले है। फिर वह उन्हें बता देगा कि वे क्या करते रहे हैं।
तफ़सीर
जिन यहूदियों एवं ईसाइयों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर लिए, चुनाँचे उन्होंने उसमें से कुछ को अपनाया और कुछ को छोड़ दिया तथा वे अलग-अलग संप्रदाय हो गए, उनसे (ऐ रसूल!) आपका कोई संबंध नहीं है। क्योंकि वे जिस पथभ्रष्टता में पड़े हुए हैं, आप उससे बरी हैं। आपका दायित्व केवल उन्हें सचेत करना है। उनका मामला तो अल्लाह ही के हवाले है। फिर वह क़ियामत के दिन उन्हें बताएगा कि वे दुनिया में क्या कर रहे थे और उन्हें उसपर बदला देगा।