सूरह Al-An'am, आयत 107

6:107

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَآ أَشۡرَكُواْۗ وَمَا جَعَلۡنَٰكَ عَلَيۡهِمۡ حَفِيظٗاۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيۡهِم بِوَكِيلٖ ١٠٧

और यदि अल्लाह चाहता, तो वे लोग साझी न बनाते, तथा हमने आपको उनपर संरक्षक नहीं बनाया और न आप उनके कोई निरीक्षक हैं।68

फ़ुटनोट

68 आयत का भावार्थ यह है कि नबी का यह कर्तव्य नहीं कि वह सबको सीधी राह दिखा दे। उसका कर्तव्य केवल अल्लाह का संदेश पहुँचा देना है।

तफ़सीर

यदि अल्लाह की इच्छा होती कि वे उसके साथ किसी को साझी न बनाएँ, तो वे उसके साथ किसी को भी साझी न बनाते। तथा (ऐ रसूल!) हमने आपको उनपर निरीक्षक नहीं बनाया कि आप उनके कार्यों की गणना करें, तथा आप उनके प्रभारी नहीं हैं। आप तो केवल एक रसूल हैं और आपका दायित्व केवल अल्लाह के संदेश को पहुँचा देना है।