إِن تُبۡدُواْ شَيۡـًٔا أَوۡ تُخۡفُوهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٗا ٥٤
यदि तुम किसी चीज़ को प्रकट करो अथवा उसे गुप्त रखो, अल्लाह प्रत्येक वस्तु को अच्छी तरह जानता है।
तफ़सीर
तुम अपने किसी कार्य को प्रकट करो या उसे अपने मन में छिपाकर रखो, वह अल्लाह से हरगिज़ नहीं छिप सकता। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु का ज्ञान रखता है। उससे तुम्हारा कोई काम या कोई अन्य चीज़ छिपी नहीं रह सकती। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा; यदि अच्छा कर्म है तो अच्छा बदला और यदि बुरा कर्म है तो बुरा बदला।