وَإِذَا حُشِرَ ٱلنَّاسُ كَانُواْ لَهُمۡ أَعۡدَآءٗ وَكَانُواْ بِعِبَادَتِهِمۡ كَٰفِرِينَ ٦
तथा जब लोग एकत्र किए जाएँगे, तो वे उनके शत्रु होंगे और उनकी इबादत का इनकार करने वाले होंगे।3
फ़ुटनोट
3 इस विषय की चर्चा क़ुरआन की अनेक आयतों में आई है। जैसे सूरत यूनुस, आयत : 290, सूरत मरयम, आयत : 81-82, सूरतुल-अनकबूत, आयत : 25 आदि।
तफ़सीर
हालाँकि ये मूर्तियाँ उन्हें इस दुनिया में कोई लाभ नहीं पहुँचा सकतीं, इसके बावजूद जब वे क़ियामत के दिन एकत्र किए जाएँगे, तो वे उनके दुश्मन हो जाएँगे जो उनकी पूजा करते थे, और उनसे अलगाव प्रकट करेंगे और इस बात का इनकार कर देंगे कि वे उनकी पूजा के बारे में जानते थे।