يَٰصَٰحِبَيِ ٱلسِّجۡنِ ءَأَرۡبَابٞ مُّتَفَرِّقُونَ خَيۡرٌ أَمِ ٱللَّهُ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّارُ ٣٩
ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! क्या अलग-अलग अनेक पूज्य बेहतर हैं या एक प्रभुत्वशाली अल्लाह?
तफ़सीर
फिर यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने जेल के अंदर दोनों युवकों को संबोधित करते हुए कहा : क्या कई देवी-देवताओं की पूजा अच्छा है या एक अल्लाह की इबादत करना, जिसका कोई साझी नहीं, जो सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसे पराजित नही किया जा सकता।