وَجَآءُوٓ أَبَاهُمۡ عِشَآءٗ يَبۡكُونَ ١٦
और वे इशा के वक़्त रोते हुए अपने पिता के पास आए।
तफ़सीर
और यूसुफ़ के भाई अपने फ़रेब को चलाने के लिए रोने का ढोंग करते हुए इशा के समय अपने पिता के पास आए।
وَجَآءُوٓ أَبَاهُمۡ عِشَآءٗ يَبۡكُونَ ١٦
और वे इशा के वक़्त रोते हुए अपने पिता के पास आए।
और यूसुफ़ के भाई अपने फ़रेब को चलाने के लिए रोने का ढोंग करते हुए इशा के समय अपने पिता के पास आए।