وَيَٰقَوۡمِ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمۡ ثُمَّ تُوبُوٓاْ إِلَيۡهِ يُرۡسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيۡكُم مِّدۡرَارٗا وَيَزِدۡكُمۡ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمۡ وَلَا تَتَوَلَّوۡاْ مُجۡرِمِينَ ٥٢
ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा याचना करो। फिर उसकी ओर पलट आओ। वह आकाश से तुमपर खूब बारिश बरसाएगा और तुम्हारी शक्ति और अधिक बढ़ा देगा और विमुख हो कर अपराधी न बनो।
तफ़सीर
और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह से क्षमा माँगो, फिर अपने गुनाहों से - जिनमें से सबसे बड़ा शिर्क है - उसके समक्ष तौबा करो। वह उसके फलस्वरूप तुमपर बहुत बारिश बरसाएगा और तुम्हारे संतान और धन में वृद्धि करके तुम्हें अधिक शक्ति एवं सम्मान प्रदान करेगा। और मैं तुम्हें जिसकी ओर आमंत्रित कर रहा हूँ, उससे मुँह मत फेरो। अन्यथा तुम मेरे आह्वान से मुँह फेरने, अल्लाह के साथ कुफ्र करने और मेरी लाई हुई बात को झुठलाने के कारण, अपराधियों में से हो जाओगे।