أَلَا لِلَّهِ ٱلدِّينُ ٱلۡخَالِصُۚ وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَ مَا نَعۡبُدُهُمۡ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَآ إِلَى ٱللَّهِ زُلۡفَىٰٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَحۡكُمُ بَيۡنَهُمۡ فِي مَا هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَنۡ هُوَ كَٰذِبٞ كَفَّارٞ ٣
सुन लो! ख़ालिस (विशुद्ध) धर्म केवल अल्लाह ही के लिए है। तथा जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं (वे कहते हैं कि) हम उनकी पूजा केवल इसलिए करते हैं कि वे हमें अल्लाह से क़रीब1 कर दें। निश्चय अल्लाह उनके बीच उसके बारे में निर्णय करेगा, जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं। निःसंदेह अल्लाह उसे मार्गदर्शन नहीं करता, जो झूठा, बड़ा नाशुक्रा हो।
फ़ुटनोट
1 मक्का के काफ़िर यह मानते थे कि अल्लाह ही वास्तविक पूज्य है। परंतु वे यह समझते थे कि उसका दरबार बहुत ऊँचा है, इसलिए वे इन पूज्यों को माध्यम बनाते थे। ताकि इनके द्वारा उनकी प्रार्थनाएँ अल्लाह तक पहुँच जाएँ। यही बात साधारणतः मुश्रिक कहते आए हैं। इन तीन आयतों में उनके इसी कुविचार का खंडन किया गया है। फिर उनमें कुछ ऐसे थे जो समझते थे कि अल्लाह के संतान है। कुछ, फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते, और कुछ, नबियों (जैसे ईसा) को अल्लाह का पुत्र कहते थे। यहाँ इसी का खंडन किया गया है।
तफ़सीर
सुन लो, शिर्क से खाली धर्म केवल अल्लाह के लिए है। और जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा मूर्तियों और ताग़ूतों को संरक्षक बना रखा है, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं और उनकी पूजा करने का कारण बयान करते हुए कहते हैं : हम इनकी पूजा केवल इसलिए करते हैं कि ये हमें अल्लाह से निकट कर दें, हमारी ज़रूरतों को उसके सामने रखें और उसके निकट हमारी सिफ़ारिश करें। निश्चय अल्लाह क़ियामत के दिन एकेश्वरवादी मोमिनों और बहुदेववादी काफ़िरों के बीच, उस तौहीद के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसके विषय में वे मतभेद किया करते थे। निःसंदेह अल्लाह उस व्यक्ति को सत्य की राह नहीं दिखाता, जो अल्लाह पर झूठ गढ़ने वाला है, उसकी ओर साझी की निस्बत करता है, तथा अल्लाह की मिली हुई नेमतों की बहुत नाशुक्री करने वाला है।