सूरह At-Tahrim, आयत 6

66:6

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قُوٓاْ أَنفُسَكُمۡ وَأَهۡلِيكُمۡ نَارٗا وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلۡحِجَارَةُ عَلَيۡهَا مَلَٰٓئِكَةٌ غِلَاظٞ شِدَادٞ لَّا يَعۡصُونَ ٱللَّهَ مَآ أَمَرَهُمۡ وَيَفۡعَلُونَ مَا يُؤۡمَرُونَ ٦

ऐ ईमान वालो! अपने आपको और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ5 जिसका ईंधन मनुष्य और पत्थर हैं। जिसपर कठोर दिल, बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त हैं। जो अल्लाह उन्हें आदेश दे, उसकी अवज्ञा नहीं करते तथा वे वही करते हैं, जिसका उन्हें आदेश दिया जाता है।

फ़ुटनोट

5 अर्थात तुम्हारा कर्तव्य है कि अपने परिजनों को इस्लाम की शिक्षा दो ताकि वे इस्लामी जीवन व्यतीत करें और नरक का ईंधन बनने से बच जाएँ। ह़दीस में है कि जब बच्चा सात वर्ष का हो जाए, तो उसे नमाज़ पढ़ने का आदेश दो। और जब दस वर्ष का हो जाए, तो उसे नमाज़ के लिए (यदि ज़रूरत पड़े तो) मारो। (तिर्मिज़ी : 407) पत्थर से अभिप्राय वे मूर्तियाँ हैं जिन्हें देवता और पूज्य बनाया गया था।

तफ़सीर

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपने लिए और अपने घर वालों के लिए उस भयानक आग से बचाव एवं सुरक्षा अपनाओ, जिसे मनुष्यों के द्वारा और पत्थर के ज़रिए जलाया जाएगा। इस आग पर ऐसे फ़रिश्ते नियुक्त हैं, जो उसमें प्रवेश करने वालों पर कठोर हैं और बलशाली हैं। यदि अल्लाह उन्हें कोई आदेश देता है, तो वे उसके आदेश की अवहेलना नहीं करते हैं तथा वे बिना सुस्ती और देरी के वही करते हैं जो वह उन्हें आदेश देता है।