सूरह An-Nur, आयत 37

24:37

رِجَالٞ لَّا تُلۡهِيهِمۡ تِجَٰرَةٞ وَلَا بَيۡعٌ عَن ذِكۡرِ ٱللَّهِ وَإِقَامِ ٱلصَّلَوٰةِ وَإِيتَآءِ ٱلزَّكَوٰةِ يَخَافُونَ يَوۡمٗا تَتَقَلَّبُ فِيهِ ٱلۡقُلُوبُ وَٱلۡأَبۡصَٰرُ ٣٧

ऐसे लोग, जिन्हें व्यापार तथा क्रय-विक्रय अल्लाह के स्मरण, नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने से ग़ाफ़िल नहीं करता। वे उस दिन32 से डरते हैं, जिसमें दिल तथा आँखें उलट जाएँगी।

फ़ुटनोट

32 अर्थात प्रलय के दिन।

तफ़सीर

वे ऐसे लोग हैं, जिन्हें ख़रीद या बिक्री अल्लाह का ज़िक्र करने, संपूर्ण तरीके से नमाज़ अदा करने और ज़कात के हक़दारों को ज़कात देने से ग़ाफ़िल नहीं करती। वे क़ियामत के दिन से डरते हैं। वह दिन, जब लोगों के दिल यातना से मुक्ति की आशा और उससे भय के बीच डोल रहे होंगे और निगाहें इधर-उधर फिर रही होंगी कि उन्हें किधर जाना है।