सूरह An-Naba, आयत 35

78:35

لَّا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوٗا وَلَا كِذَّٰبٗا ٣٥

वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।

तफ़सीर

वे जन्नत में कोई निरर्थक बात नहीं सुनेंगे और न कोई झूठ सुनेंगे और न वे एक-दूसरे को झुठलाएँगे।