لَّا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوٗا وَلَا كِذَّٰبٗا ٣٥
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
तफ़सीर
वे जन्नत में कोई निरर्थक बात नहीं सुनेंगे और न कोई झूठ सुनेंगे और न वे एक-दूसरे को झुठलाएँगे।
لَّا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوٗا وَلَا كِذَّٰبٗا ٣٥
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
वे जन्नत में कोई निरर्थक बात नहीं सुनेंगे और न कोई झूठ सुनेंगे और न वे एक-दूसरे को झुठलाएँगे।