وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ مِنۢ بَعۡدِ مَآ أَهۡلَكۡنَا ٱلۡقُرُونَ ٱلۡأُولَىٰ بَصَآئِرَ لِلنَّاسِ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ لَّعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ ٤٣
और निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की, इसके पश्चात् कि हमने पहली नस्लों को विनष्ट कर दिया, जो लोगों के लिए अंतर्दृष्टिपूर्ण तर्क तथा मार्गदर्शन और दया थी, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
तफ़सीर
हमने मूसा अलैहिस्सलाम को तौरात प्रदान की, इसके पश्चात कि जब हमने पिछली जातियों की ओर अपने रसूल भेजे, लेकिन उन्होंने उन्हें झुठला दिया, तो हमने उन्हें झुठलाने के कारण उनका विनाश कर दिया। इसमें लोगों के लिए यह व्याख्या मौजूद है कि उनके लिए क्या लाभदायक है, कि वे उसपर अमल करें और उनके लिए क्या हानिकारक है, कि वे उसे छोड़ दें। तथा इसमें भलाई की ओर उनका मार्गदर्शन और दया है क्योंकि इसमें दुनिया एवं आख़िरत की भलाई है, ताकि वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को याद करें और उसका शुक्र करें और उसपर ईमान लाएँ।