सूरह Al-Mu'minun, आयत 100

23:100

لَعَلِّيٓ أَعۡمَلُ صَٰلِحٗا فِيمَا تَرَكۡتُۚ كَلَّآۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَآئِلُهَاۖ وَمِن وَرَآئِهِم بَرۡزَخٌ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ ١٠٠

ताकि मैं जो कुछ छोड़ आया हूँ, उसमें कोई नेक कार्य कर लूँ। हरगिज़ नहीं, यह तो मात्र एक बात है, जिसे वह कहने वाला25 है और उनके पीछे उस दिन तक जब वे (पुनः) उठाए जाएँगे, एक ओट26 है।

फ़ुटनोट

25 अर्थात उसके कथन का कोई प्रभाव नहीं होगा।

26 ओट जिसके लिए बर्ज़ख शब्द आया है, उस अवधि का नाम है जो मृत्यु तथा प्रलय के बीच होगी।

तफ़सीर

ताकि मैं संसार में लौटकर कोई नेक काम कर लूँ। कदापि नहीं, मामला वैसा नहीं है, जैसा कि उसने अनुरोध किया है। यह केवल एक शब्द है जो वह कहने वाला है। अगर उसे सांसारिक जीवन में वापस भेज दिया जाए, तो वह अपना किया हुआ वादा पूरा नहीं करेगा। ये मरने वाले लोग, क़ियामत के दिन तक दुनिया और आख़िरत के बीच एक ओट में रहेंगे। इसलिए वे वहाँ से दुनिया में वापस नहीं आएँगे कि जो कुछ उनसे छूट गया है, उसकी छतिपूर्ति कर लें और जो कुछ उन्होंने बिगाड़ा है, उसे ठीक कर लें।