إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ إِخۡوَةٞ فَأَصۡلِحُواْ بَيۡنَ أَخَوَيۡكُمۡۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ ١٠
निःसंदेह ईमान वाले तो भाई ही हैं। अतः अपने दो भाइयों के बीच सुलह करा दो। तथा अल्लाह से डरो, ताकि तुम पर दया की जाए।
तफ़सीर
ईमान वाले तो इस्लाम में भाई हैं, और इस्लाम में भाईचारे का तक़ाज़ा है यह है कि (ऐ ईमान वालो!) तुम अपने दो झगड़ने वाले भाइयों के बीच मेल-मिलाप करा दो। तथा अल्लाह से, उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरते रहो; इस आशा में कि तुमपर दया की जाए।