सूरह Al-Hajj, आयत 71

22:71

وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَٰنٗا وَمَا لَيۡسَ لَهُم بِهِۦ عِلۡمٞۗ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٖ ٧١

और वे अल्लाह के सिवा उसकी इबादत करते हैं, जिसका उसने कोई प्रमाण नहीं उतारा, और न उनके पास उसकी कोई जानकारी है। और अत्याचारियों का कोई सहायक नहीं।

तफ़सीर

और मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा करने का अल्लाह ने अपनी पुस्तकों में कोई प्रमाण नहीं उतारा है, तथा इसके लिए उनके पास ज्ञान का भी कोई सबूत नहीं है। उनका प्रमाण केवल अपने बाप-दादा का अंधा अनुकरण है। और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं, जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।