وَإِذۡ بَوَّأۡنَا لِإِبۡرَٰهِيمَ مَكَانَ ٱلۡبَيۡتِ أَن لَّا تُشۡرِكۡ بِي شَيۡـٔٗا وَطَهِّرۡ بَيۡتِيَ لِلطَّآئِفِينَ وَٱلۡقَآئِمِينَ وَٱلرُّكَّعِ ٱلسُّجُودِ ٢٦
तथा (वह समय याद करो) जब हमने इबराहीम के लिए इस घर का स्थान16 निर्धारित कर दिया (और उसे आदेश दिया) कि किसी को मेरा साझी न बनाना, तथा मेरे घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करने वालों, क़ियाम करने वालों तथा रुकू' और सजदा करने वालों के लिए पवित्र रखना।
फ़ुटनोट
16 अर्थात उसका निर्माण करने के लिए। क्योंकि नूह़ (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान के कारण सब बह गया था इसलिए अल्लाह ने इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के लिए बैतुल्लाह का वास्तविक स्थान निर्धारित कर दिया। और उन्होंने अपने पुत्र इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के साथ उसे दोबारा स्थापित किया।
तफ़सीर
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब हमने इबराहीम अलैहिस्सलाम को काबा का स्थान और उसकी सीमाएँ बता दीं, जबकि वह अज्ञात था। और हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि मेरी इबादत में किसी को साझी न बनाना, बल्कि केवल मेरी ही इबादत करना और मेरे घर को उसका तवाफ़ करने वालों और उसमें नमाज़ पढ़ने वालों के लिए नज़र आने वाली और नज़र न आने वाली (ज़ाहिरी व बातिनी) अशुद्धियों से पवित्र रखना।