وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱسۡجُدُواْۤ لِلرَّحۡمَٰنِ قَالُواْ وَمَا ٱلرَّحۡمَٰنُ أَنَسۡجُدُ لِمَا تَأۡمُرُنَا وَزَادَهُمۡ نُفُورٗا۩ ٦٠
और जब उनसे कहा जाता है कि 'रह़मान' (अत्यंत दयावान्) को सजदा करो, तो कहते हैं कि 'रह़मान' क्या है? क्या हम उसे सजदा करें, जिसके लिए तू हमें आदेश देता है? और यह बात उन्हें बिदकने में और बढ़ा देती है।
तफ़सीर
और जब काफ़िरों से कहा जाता है कि रह़मान (अत्यंत दयावान्) को सजदा करो, तो वे कहते हैं कि हम रहमान को सजदा नहीं करते और रह़मान क्या चीज़ है? हम उसे नहीं जानते और न ही उसे स्वीकार करते हैं। क्या हम उसे सजदा करने लगें, जिसे सजदा करने का तू हमें आदेश देता है जबकि हम उसे नहीं जानते हैं?! तथा उसका उन्हें सजदा करने के आदेश ने उन्हें अल्लाह पर ईमान लाने से दूरी में और बढ़ा दिया।