وَإِن كُنتُمۡ فِي رَيۡبٖ مِّمَّا نَزَّلۡنَا عَلَىٰ عَبۡدِنَا فَأۡتُواْ بِسُورَةٖ مِّن مِّثۡلِهِۦ وَٱدۡعُواْ شُهَدَآءَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٢٣
और यदि तुम उस (पुस्तक) के बारे में किसी संदेह में हो, जो हमने अपने बंदे पर उतारा है, तो उसके समान एक सूरत ले आओ और अल्लाह के सिवा अपने समर्थकों को भी बुला लो, यदि तुम सच्चे11 हो।
फ़ुटनोट
11 आयत का भावार्थ यह है कि नबी के सत्य होने का प्रमाण आप पर उतारा गया क़ुरआन है। यह उनकी अपनी बनाई बात नहीं है। क़ुरआन ने ऐसी चुनौती अन्य आयतों में भी दी है। (देखिए : सूरतुल-क़सस, आयत : 49, इसरा, आयत : 88, हूद, आयत :13 और यूनुस, आयत : 38)
तफ़सीर
ऐ लोगो! यदि तुम्हें हमारे बंदे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारे गए क़ुरआन के बारे में किसी प्रकार का संदेह है, तो हम तुम्हें चुनौती देते हैं कि उस जैसी एक सूरत ही लाकर उसका विरोध करो, भले ही वह उसकी छोटी से छोटी सूरत के बराबर ही क्यों न हो। तथा अपने समर्थकों में से जिसे भी बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो।