قُلۡ أَمَرَ رَبِّي بِٱلۡقِسۡطِۖ وَأَقِيمُواْ وُجُوهَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٖ وَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَۚ كَمَا بَدَأَكُمۡ تَعُودُونَ ٢٩
आप कह दें : मेरे पालनहार ने न्याय का आदेश दिया है। तथा प्रत्येक नमाज़ के समय अपने चेहरे को सीधा रखो, और उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए उसे पुकारो। जिस तरह उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा पैदा करेगा।9
फ़ुटनोट
9 इस आयत में सत्य धर्म के तीन मूल नियम बताए गए हैं : कर्म में संतुलन, इबादत में अल्लाह की ओर ध्यान तथा धर्म में विशुद्धता तथा एक अल्लाह की इबादत करना।
तफ़सीर
(ऐ मुहम्मद!) इन मुश्रिकों से कह दें : अल्लाह ने न्याय का आदेश दिया है, अश्लीलता और बुराई का आदेश नहीं दिया है। तथा उसने आदेश दिया है कि तुम इबादत को सामान्य रूप से और विशेष रूप से मस्जिदों में उसी के लिए ख़ालिस करो, और यह कि तुम केवल उसे ही पुकारो आज्ञाकारिता को उसी के लिए विशिष्ट करते हुए। जिस तरह उसने तुम्हें पहली बार अनस्तित्व से पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा जीवित करेगा। क्योंकि जो तुम्हें पहली बार पैदा करने में सक्षम है, वह तुम्हें वापस लौटाने और तुम्हें पुनर्जीवित करने में भी सक्षम है।