أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ نَتَقَبَّلُ عَنۡهُمۡ أَحۡسَنَ مَا عَمِلُواْ وَنَتَجَاوَزُ عَن سَيِّـَٔاتِهِمۡ فِيٓ أَصۡحَٰبِ ٱلۡجَنَّةِۖ وَعۡدَ ٱلصِّدۡقِ ٱلَّذِي كَانُواْ يُوعَدُونَ ١٦
यही वे लोग हैं, जिनके सबसे अच्छे कर्मों को हम स्वीकार करते हैं और उनकी बुराइयों को क्षमा कर देते हैं, इस हाल में कि वे जन्नत वालों में से हैं, सच्चे वादे के अनुरूप, जो उनसे वादा किया जाता है।
तफ़सीर
यही वे लोग हैं कि हम उनके द्वारा किए गए सबसे अच्छे कामों को स्वीकार करते हैं और उनके बुरे कामों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, इसलिए हम उनपर उनकी पकड़ नहीं करते हैं। तथा वे जन्नत वालों में शामिल हैं। यह वादा जो उनसे किया गया है, बिलकुल सच्चा वादा है, अनिवार्य रूप से पूरा होगा।